संदेश

नवंबर, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विक्रम - बेताल की कहानी का क्या है सच ? .What is the truth of the story of Vikram-Betal ?

चित्र
विक्रम - बेताल की कहानी का क्या है सच ? vikram aur betal  यह कहानी सच है।  क्योंकि इस कहानी का साक्ष रामानंद द्वारा बनाये गए सेरियल और  कई ग्रंथो में मिलता है।  जिन्हे   कई  रचित  की गयी ग्रंथो में साक्ष मिले   है । साथ ही बताउगा की कौन थे।  राजा विक्रम और वह उस भयानक   बेताल  जिसके मुख से खून टपकता हुआ बेताल को लाने क्यों वह उस जंगल में चले गए थे।  प्राचीन  काल में  जो एक धारा नाम की नगरी में एक आदर्श राजा विक्रम रहा करते थे। कहा जाता है की वह अपने शौर्य पराक्रम और साहस के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध थे। ऐसा भी कहा जाता है की राजा विक्रम अपनी प्रजा के जीवन के सुख के दुःख जानने के लिए रात में भेष बदल कर घूमा करते थे। वे बड़े ही दयालू किस्म के राजा थे।  वह दुखियों का दुःख भी दूर किया करते थे।  महाराज विक्रम और बेताल के किस्सों पर बहुत सारे ग्रन्थ भी रचे गए है।   महाराज विक्रमादित्य और बेताल के किस्सों पर छपी बेताल पच्चीसी  किसी सिंघासन बत्तीसी नाम के ग्रन्थ आज...

( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 17 , 18 . 19 . 20 . 21 . 22 .23 . 24 . 25 कहानी हिंदी में ,( vikram betal ) story in hindi part - 17 . 18 .19 .20 . 21 . 22 . 23 . 24 . 25

चित्र
vikram - betal भाग 17  अधिक साहसी कौन  ? चंद्रशेखर नगर में एक रत्नदत्त नाम का सेठ रहता था। उसके एक लड़की थी। उसका नाम उन्मादिति था। जब वह लड़की हुई तो रत्नदत्त ने राजा  पास जाकर कहा की अगर आप चाहे तो मेरी बेटी से विवाह कर लीजिये। राजा ने तीन दासियों को लड़की को देखने के लिए भेजा।  उन्होंने उन्मादिति को देखा तो उसके रूप पर वह मुग्ध हो गयी , लेकिन उन्होंने यह सोचकर राजा को उल्टा बता दिया की कहीं राजा उसके वश में न हो जाये और राज्य की दुर्दशा हो जाये इसलिए , उन्होंने आकर कह दिया की वह तो कुलक्षणी है।  राजा ने सेठ को मना कर दिया।  इसके बाद सेठ ने उसकी शादी राजा के सेनापति बलभद्र के साथ कर दिया। वे दोनों अच्छे से रहने लगे।  एक दिन राजा की सवारी उस रास्ते से निकली। जंहा सेनापति का घर था। उस समय उन्मादिति अपने कोठे पर खड़ी थी। राजा की निगाह उस पर पड़ी तो वह उस पर मोहित हो गया। उसने पता लगाया।  मालूम हुआ की वह सेठ की लड़की है। राजा ने सोचा की हो न हो जिन दसियों को मैंने देखने भेजा था , उन्होंने छल किया मेरे साथ।  राजा ने उन्हें बुलाया तो उन्होंने आकर सारी ...

कहानी हिंदी में ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 14 , 15 , 16 .best story in hindi ( vikram - betal ) part - 14 , 15 , 16

चित्र
चोर जोर - जोर से रोया फिर हँसा क्यों ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट -14  विक्रम - बेताल  आयोध्या नगरी में वीरकेतु नाम का राजा राज करता था।  उसके राज्य में रत्नदत्त नाम का एक साहूकार था , जिसके रत्नवती नाम की एक लड़की थी।  वह बहुत सुन्दर थी। पर वह पुरुष भेष में रहा करती थी और किसी से ब्याह नहीं करना चाहती थी। उसका पिता बड़ा दुखी था।  इसी बीच में नगर में खूब चोरिया होने लगी।  जिससे प्रजा बहुत दुखी थी।  कोशिश करने के बाद भी जब चोर पकड़ में  नहीं आया तो राजा स्वमं उसे पकड़ने के लिए निकला।  एक दिन रात को जब राजा भेष बदलकर घूम रहा था  तो उसे परकोटे के पास एक आदमी दिखाए दिया। राजा चुप -   चाप उसके पीछे चल दिया।  चोर ने पूछा तुम कौन हो , राजा ने कहा मैं पास के गांव का एक छोटा चोर हूँ।  चोर ने कहा , तब तो तुम मेरे साथी हो।  आओ , मेरे घर चले।  दोनों घर पहुंचे।  उसे बिठाकर चोर किसी काम के लिए बाहर चला गया। इसी बीच में उसकी दासी आयी और बोली , तुम यंहा क्यों आये हो ? चोर तुम्हे मार डालेगा।  भाग जाओ।  राजा ने ऐसा ह...

अपराधी कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 13 . story in hindi , aparaadhee kaun ? ( vkram - betal ) part - 1

चित्र
अपराधी कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 13  विक्रम और बेताल  बनारस में देवस्वामी नाम का  ब्राह्मण रहता था।  उसके हरिदास नाम का पुत्र था।  हरिदास की बड़ी सुन्दर पत्नी थी। उसका नाम लावण्यवती था। एक दिन वे महल के ऊपर छत पर सो रहे थे। की आधी रात के समय एक गंधर्व - कुमार आकाश से घूमता हुआ उधर से निकला।  वह लावण्यवती के रूप पर मुग्ध होकर उसे उड़ा कर ले गया। जागने पर हरिदास ने देखा की उसकी स्त्री नहीं है  बड़ा दुःख हुआ और वह मरने के लिए तैयार हो गया।  लोंगो के समझाने पर वह मान गया।  लेकिन यह सोच कर की तीरथ करने से शायद पाप दूर हो जाये और स्त्री मिल जाय।  वह घर से निकल पड़ा।  चलते -चलते वह किसी गांव में एक ब्राह्मण के घर पहुंचा।  उसे भूखा देखकर ब्राह्मणी ने उसे कटोरा भरकर खीर दे दी और तालाब के किनारे बैठकर खाने को कहा।  हरिदास खीर लेकर एक पेड़ के नीचे आया और कटोरा वंहा रखकर तालाब में हाथ - मुँह धोने गया।  इसी बीच एक बाज किसी सांप को लेकर उसी पेड़ पर आ बैठा और जब वह खाने लगा तो सांप के मुँह से जहर टपक कर कटोरे में गिर गया।  हरि...

दीवान की मृत्यु क्यों हुई ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 12 . story in hindi , deewan ki mratyu kyon ? ( vikram -betal ) part 12

चित्र
दीवान की मृत्यु क्यों हुई ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 12 विक्रम - बेताल  किसी ज़माने में अंगदेश में यशकेतु नाम का राजा राज करता था।  उसके दीर्घदर्शी नाम का चतुर दीवान था। राजा बड़ा विलासी था।  राज्य का सारा बोझ दीवान पर डाल कर वह भोग में पड़ गया। दीवान को बहुत दुःख हुआ। उसने देखा की राजा के साथ सब जगह उसकी भी निंदा होती है। इसलिए वह तीरथ  का बहाना लेकर चल पड़ा।  चलते - चलते रस्ते में उसे एक शिव - मंदिर मिला।  उसी समय विछिदत्त नाम का एक सौदागर वंहा आया और दीवान के पूछने पर उसने बताया की वह सुवर्णदीप पर व्यापार करने जा रहा है। दीवान भी उसके साथ हो लिया।  दोनों जहाज पर चढ़कर सुवर्णदीप पहुंचे और वंहा व्यापार करके धन कमा कर लौटे।  रास्ते में समुद्र में एक दीवान को एक कल्पवृक्ष दीखाई दिया। उसकी मोटी सखाओं पर रत्नो से जुड़ा एक पलंग बिछा था।  उस पर एक रूपवती कन्या बैठी वीणा बजा रही थी। थोड़ी देर में वह गायब हो गयी।  पेड़ भी नहीं रहा।  दीवान बड़ा चकित हुआ।  दीवान ने अपने नगर में लौटकर सारा हाल राजा को कह सुनाया।  इसीबीच इतने दिनो तक राज्य ...

सबसे अधिक सुकुमार कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 11 , stroy in hindi , sabse adhik sukumar kaun ? ( vikram - betal ) part-11

चित्र
सबसे अधिक सुकुमार कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 11  vikram - betal गौड़ देश में वर्धमान नाम का एक नगर था। जिसमे गुण शेखर नाम  का राजा राज करता था।  उसके अभयचंद्र नाम का दीवान था।  उस दीवान के समझाने से राजा ने अपने राज्य में शिव और विष्णु की पूजा की , गोदान , भूदान , पिंडदान आदि सब  बंद कर दिए।  नगर में डोंडी पिटवा दी की जो कोइ ये काम करेगा , उसका सबकुछ छीनकर उसे नगर से निकाल दिया जायगा।  एक दिन दीवान ने कहा , महाराज , अगर कोई किसी को दुख पहुंचाता है और उसके प्राण ले लेता है तो पाप से उसका जन्म मरण नहीं छूटता।  वह बार - बार जन्म लेता और मरता है। इसलिए मनुष्य का जन्म पाकर धर्म करना चाहिए।  आदंमी को हाथी से लेकर चींटी तक सबकी रक्षा करनी चाहिए।  जो लोगे दुसरो को नहीं समझते और उन्हें सताते है , उनकी इस पृथ्वी पर उम्र घटती है और वे लूले , लंगड़े , काने , बौने होकर जन्म लेते है।  राजा ने कहा ठीक है ,अब दीवान जैसे कहता , राजा वैसे ही करता। दैवयोग से राजा एक दिन मर गया। उसकी जगह उसका  बेटा धर्मराज गद्दी पर बैठा। एक दिन उसने किसी बात प...

सबसे बड़ा त्यागी कौन ? ( विक्रम -बेताल ) पार्ट - 10 . hindi me kahani . sabse bada tyagi kaun ? vikarm - betal part -10

चित्र
सबसे बड़ा त्यागी कौन ? ( विक्रम -बेताल ) पार्ट - 10  विक्रम - बेताल  मदनपुर नगर में वीरवर नाम का एक राजा राज करता था।  उसके राज्य एक वैश्य था , जिसका नाम हिरण्यदत्त था।  उसके मदन सेना नाम की एक कन्या थी।   एक दिन मदनसेना अपनी सखियों के साथ बाग़ में घूमने के लिये गयी।   वंहा संयोग से सोमदत्त नामक सेठ का लड़का धर्मदत्त  मित्रो के साथ आया हुआ था।  वह मदन सेना को देखते ही प्रेम करने लगा। घर लौट कर सारी रात उसके लिए बेचैन रहा।  अगले दिन वह फिर बाग़ में गया।  मदनसेना वंहा अकेले बैठी थी।  उसके पास जाकर उसने कहा ,   मैं तुमसे प्रेम करता हूँ अगर तुम भी मुझसे प्रेम नहीं करोगी तो मैं अपने प्राण दे दूंगा।  मदनसेना ने जवाब दिया , आज से पांचवे दिन मेरी शादी होने वाली है।  मैं तुम्हारी नहीं हो सकती।  वह बोला , मैं तुम्हारे बिना जीवित नहीं रह सकता।  मदनसेना डर गयी।  बोली , अच्छी बात है। मेरा ब्याह हो जाने दो। मैं अपने पति के पास जाने से पहले तुमसे जरूर मिलूंगी।  वचन दे कर मदनसेना दर गयी।  उसका विवा...

सर्वश्रेस्ठ वर कौन ? ( विक्रम -बेताल ) पार्ट - 9. sarvshreshth var kaun ? ( vikram - betal ) part - 9 story in hindi

चित्र
सर्वश्रेस्ठ  वर कौन ?  ( विक्रम -बेताल ) पार्ट - 9 विक्रम - बेताल  चम्पापुर नाम का एक नगर था , जिसमे चम्पकेश्वर नाम का राजा राज करता था। उसके सुलोचना नाम की रानी थी और त्रिभुवनसुंदरी नाम की लड़की थी।  राजकुमारी यथा नाम तथा गुण थी। जब वह बड़ी हुई तो उसका रूप और निखर आया।  राजा और रानी को उसके विवाह की चिंता हुई।  चारो ओर इसकी खबर फ़ैल गयी।  बहुत - से राजाओं ने  अपनी - अपनी तस्वीर बनवाकर भेजी , पर राजकुमारी ने किसी को भी पसंद न किया।  राजा ने कहा , बेटी कहो तो स्वयँवर करूँ ?  लेकिन वह राजी नहीं हुई। आखिर राजा ने तय किया की वह उसका विवाह उसी आदमी के साथ करेगा , जो रूप , बल और ज्ञान , इन तीनो में बढ़ाचढ़ा होगा।  एक दिन राजा के पास चार देश के चार वर आये।  एक ने कहा , मैं एक कपडा बनाकर पांच लाख में बेचता हूँ , एक लाख देवता में चढ़ाता हूँ , एक लाख अपने अंग लगता हूँ , एक लाख स्त्री के लिए रखता हूँ और एक लाख से अपने खाने - पीने का खर्च चलाता हूँ।  इस विद्या को और कोइ नहीं जानता है।  दूसरा बोला  , मैं जल - थल के पशुओ की भाषा...

किसका काम बढ़कर ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 7 kiska kaam badkar ? ( vikram - betal ) part - 7

चित्र
किसका काम बढ़कर ?     vikram - betal मिथलावती नाम की एक नगरी थी।  उसमे गुणधिप नाम का राजा राज करता था।  उसकी सेवा करने के लिए एक दूर देश का राजकुमार आया।  वह बराबर  राजा से मिलने की कोशिश करता रहा लेकिन  भेंट नहीं हो पाई।  वह जो कुछ भी आपने साथ लाया था।  वह सब बराबर  हो गया।   एक दिन राजा शिकार खेलने चला।  राजकुमार भी उसके पीछे लग गया।  चलते - चलते राजा एक वन में पहुंचा  वंहा उसके नौकर - चाकर बिछड़ गए।  राजा के साथ अकेला राजकुमार ही रह गया।  उसने राजा को रोका।  राजा ने उसकी ओर देखा और पूछा तू इतना कमजोर क्यों हो रहा है।  उसने कहा , महाराज , इसमें मेरे कर्मो का दोष है।  मैं जिस राजा के पास रहता हूँ।  वह हजारो को पालता है, पर उसकी नजर मेरी ओर नहीं जाती है।  राजन छह बाते आदमी को  हल्का करती है - खोटे  नर की प्रीत ,बिना कारण हँसी , स्त्री से विवाद ,असज्जन स्वामी की सेवा , गधे की सवारी और बिना संस्कृत की भाषा।  और हे राजा , ये पांच चीजे आदमी के पैदा होते ही विधाता उ...

सबसे बढ़कर कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 8 . sabse badkar kaun ? ( vikram - betal ) part - 8

चित्र
सबसे बढ़कर कौन ? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 8  vikram - betal  अंग देश के एक गांव में एक धनी ब्राह्मण रहता था।  उसके तीन पुत्र थे।  एक  बार ब्राह्मण ने यज्ञ करना चाहा।  उसके लिए एक कछुए की जरूरत हुयी।  उसने तीनो भाइयो को कछुआ लाने को कहा।  वे तीनो समुद्र पर पहुंचे।  वंहा एक कछुआ मिल गया।  बड़े ने कहा , मैं भोजन चंग हूँ , इसी लिए कछुए को नहीं छूउंगा।  मंझला बोला, मैं नारी चंग हूँ , मैं नहीं ले जाऊंगा। सबसे छोटा बोला , मैं शैयाचंग हूँ , सो मैं भी नहीं ले जाऊंगा।   वे तीनो इसी बहस में पड़ गए की उनमे कौन बढ़कर है।  जब वे आपस में इसका फैसला न कर सके  तो राजा के पास पहुंचे।  राजा ने कहा , आप लोग तीनो रुके।  आप तीनो की जाँच करूँगा।  इसके बाद राजा ने बढ़िया भोजन तैयार कराया और तीनो खाने बैठे।  सबसे बड़े ने कहा , मैं खाना नहीं खाऊंगा।  इसमें मुर्दे की गंध आ रही।  वह वंहा से उठकर चला गया।  राजा ने पता लगाया तो मालूम हुआ की वह भोजन शमशान के पास के खेत का बना हुआ था।  राजा ने कहा , तुम सचमुच...

पत्नी किसकी ,? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 6 . patni kiski ? ( vikram - betal ) part - 6

चित्र
पत्नी किसकी ,? ( विक्रम - बेताल ) पार्ट - 6  विक्रम - बेताल  धर्मपुर नाम की नगरी थी। उसमे धर्मशील नाम का राजा राज करता था। उसके अंधक नाम का दीवान था। एक दिन दीवान ने कहा ," महाराज , एक मंदिर बनवाकर देवी को बिठा कर पूजा की जाये तो बड़ा पुण्य मिलेगा। " राजा ने ऐसा ही किया। एक दिन देवी ने प्रसन्न होकर उससे वर मांगने को कहा।  राजा के कोई संतान नहीं थी।  उसने देवी से प पुत्र माँगा।  देवी बोली ," अच्छी बात है , तेरे बड़ा प्रतापी पुत्र होगा।  कुछ दिन बाद राजा के एक पुत्र हुआ ," सरे नगर में बड़ी ख़ुशी मनाई  गयी।  एक दिन एक धोबी अपने मित्र के साथ उस नगर में आया।  उसकी निगाह उस देवी के मंदिर में पड़ी।  उसने देवी को प्रणाम करने का इरादा किया।  उसी समय उसे एक धोबी की लड़की दिखाई दी , जो बड़ी सुन्दर थी।  उसे देख कर वह पागल  हो गया  की उसे देख कर उसने मंदिर में जाकर देवी से प्राथना की ," हे देवी, की यह लड़की मुझे मिल जाये।  अगर मिल गयी तो मैं अपना सर तुझ पर चढ़ा दूंगा। " इसके बाद वह हर घडी बेचैन रहने लगा।  उसके  मित्र ने उसके...