mysterious places on earth in hindi _ bhangadh ka kila ?

भानगढ़ का किला 





भानगढ़ का भूतिया किला सबसे ज्यादा भूतिया  और डरावना जगह  माना जाता है , जिसे  आप शायद ही सोचना चाहे।  यह किला अपनी भूतिया और अलौकिक गतिविधियों के लिए विख्यात  है।  कहा जाता है की यह भारत का ही नहीं पूरी दुनिया का सबसे डरावना और भूतिया जगह है। 


इस जगह एक कहानी कही जाती है की बहुत पहले काला जादू करने वाले एक तांत्रिक को भानगढ़ की राजकुमारी से प्यार हो गया और वह तांत्रिक राजकुमारी को पाने का ख्वाब देखने लगा। क्योंकि वह काला जादू जानता था , तो उसने राजकुमारी को पाने के लिए राजकुमारी पर काला जादू करने की सोची।  राजकुमारी तांत्रिक की इस योजना को जान गयी और एक योजना बना कर उस तांत्रिक को मार दिया। लेकिन तांत्रिक मरते - मरते पुरे भानगढ़ को  बर्बाद होने का श्राप दे गया।   जिसके कारण पूरा भानगढ़ किला नष्ट हो गया।  

उस किले में रात्रि समय किसी भी  व्यक्ति को वंहा रात गुजारने से मना है।  इसके पीछे कारण यह माना जाता है, की जो भी व्यक्ति यँहा पर रुक जाता है  तो वह कभी भी लौट कर वापस नहीं आया है। 




वीरभद्र का मंदिर 


आंध्र प्रदेश का एक जिला है, लोपाक्षी नाम का  यही पर वीरभद्र  का मंदिर है।  यह पर पत्थर से बना एक प्राचीन मंदिर है।  और जैसे द्रविण शैली से बने सभी दक्षिण मंदिर है। वैसे ही इसका ही निर्माण हुआ है।  सभी मंदिरो  के सामान  इसके भी खम्भे है  और कुल मिला कर 70 खम्भे है।  और  सत्तर खम्बे कुछ आश्चर्य की बात नहीं है , कही पर कई मंदिरो में 100 से भी ज्यादा खम्बे वाले है।  सच , इसमें तो कोइ आश्चर्य नहीं है।  लेकिन इन सत्तर खम्बो में उनहत्तर खम्बे जमीन से लगे है। 

 इसमें की एक खाम्बा जमीन के सहारे में नहीं बल्कि हवा में लटका हुआ है।  जो लगभग एक इंच ऊपर है।  सभी खम्बो की तरह वह भी पत्थर का बना है।  और पत्थर के खम्बे भारी तो होते ही है ये आप सब जानते होंगे ही।  और इतना ही नहीं , आप एक कपडा भी इस खम्बे के नीचे से निकाल सकते है।  द्रविण शैली से बने इस मंदिर के आर्किटेक्ट   का भी कोई जवाब नहीं है 

मंदिरो के बारे में जानने के लिए आपको उनकी शैलीयों  को समझना होगा।  भारतीय शैलियों में दो प्रमुख शैली है जो -  

१ - द्रविण शैली

२ - नागर शैली 

 दक्षिण शैली  के ज्यादातर मंदिर द्रविण शैली  से बने है , इनमे जैसे - जैसे समय बीतता गया वैसे ही उनमे सुधार हुआ और शैली में भी सुधार हुआ।  उत्तर भारत के सभी मंदिर नागर  शैली  से बने है।   लेकिन नागर शैली से बने बहुत थोड़े ही मंदिर बने है।  या कहे की न के बराबर है।  

 उन्ही  में से वाराणसी के बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में एक मंदिर है।  जिसको बिड़ला मंदिर या नया विश्वनाथ मंदिर भी कहा जाता है , इस मंदिर को  बनाने का मूल उदेश्य इतिहास के क्षेत्रों को नागर शैली के बारे में बताना था।  इसको मदन मोहन मालवीय जी के आग्रह पर बिड़ला समूह के राजा बिड़ला ने बनवाया था।  



अब्दुल हामिद


आपको परम वीर चक्र से सम्मानित अब्दुल हामिद सभी को याद ही होंगे।  उनके वीर गाथा को कोइ भूल नहीं सकता है। लेकिन आप सोच रहे होंगे , उनको मैंने रहस्य में क्यों रखा।  वो इसलिए क्योंकि आजतक पाकिस्तान की आर्मी मानने को तैयार नहीं की गन लगी जीप ने उनके ने कैसे उनके सात पैट्रन टैंक उड़ा दिए ?

बात सं 1965  की है जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा था।  उस समय कम्पनी क्वाट्रर मास्टर हवलदार के पद पर उनको नियुक्त किया गया था।  अब्दुल हामिद को जो चीमा गांव के कीचड वाले रस्ते से  गन लगी जीप से गुजर रहे थे।  उस समय सामने आ रही पैटर्न टैंक।  उस समय सेना के मुख्य पद पर  पार मियां मुशर्रफ थे।  जैसे ही टैंक सामने आये तो अब्दुल हामिद ने अपने साथियों के साथ टैंक के कमजोर हिस्से में हमला कर दिया।  और ऐसे ही एक के बाद एक साथ टैंक उड़ा दिए।  लेकिन अंत में वो लड़ते - लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए।  

टैंक की मारक क्षमता और थ्री - नॉट - थ्री वाली जीप में बहुत अंतर था , लेकिन यह  उनका हौसला ही था।  जिससे इतने ढेर सारे टैंकर को उड़ा दिए।  सलाम है उनके युद्ध कौशल को। बाद में उस जीप पर अमेरिका ने भी रिसर्च भी किया की कैसे उस जीप के आगे टैंक पानी भरने लगे।  लेकिन कुछ नहीं मिला , मिलता भी कैसे उनको युद्ध योद्धा लड़ते कायर नहीं।  और जिनके आँखों में तिरंगा और देश के प्रति प्रेम और भक्ति भरी हो उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं , इसीलिए तो इंडियन आर्मी का नारा है -


WHEN GOING GETS TOUGH  , TOUGH GETS GOING 

यानि जब चलना मुश्किल हो , तब मुश्किलें भी चलेगी।  सिर्फ तकनीक से नहीं जज्बे से लड़ते है , अब्दुल रहीम जैसे फौलाद को हम दिल से सलाम करते है। 



माता हारी क्या सच में जासूस थी ?


बात अगर  जासूसी की हो और माता हारी का नाम न आये ऐसा हो ही नहीं सकता।  लेकिन माता हारी की जासूसी से क्या रहस्य  हो सकता ? दरअसल , जासूसी तो रहस्य से भरी होती है लेकिन माता हारी की जासूसी से बड़ा रहस्य है उसकी मौत का है।  माता हारी को फ़्रांस में जासूसी के आरोप में शूट कर देने की सजा दी गयी थी।  लेकिन सवाल यह है की वह जासूस थी भी या नहीं।  बहुत कम सबूत थे और जो की आर्मी कोर्ट ने सजा दिया था।  जो सिविलयन वाले कोर्ट से कम समय लेकर जल्दी से सजा देती है, उसमे गलती होने की पूरी सम्भावना है।  

माता हारी एक डांसर थी और वो फेमस थी।  अपने हिन्दू मंदिरो में नृत्य करने के लिए।  वह 1905 में फ्रांस आई और उसने इंडोनेशिया में सीखे नृत्य से काफी नाम और पैसा कमाया। उसने यह बात फैला दी की वह एल मंदिर में पैदा हुई थी।  और उसको पुजारी ने नृत्य करना सिखाया और नाम रख दिया माता - हारी।  सच तो यह था की वो नीदरलैंड की थी और  उनको हिन्दू नृत्य के बारे में आधा ज्ञान था।  और यही से शुरू हुआ माता हारी की प्रसिद्धि और वो बड़े - बड़े लोगो के साथ उठने बैठने लगी।  ऐसा माना जाता है और वो पैसे के लिए फ्रांस की सीक्रेट एजेंट बन गयी। 

बाद में वह जर्मनी के लिए भी जासूसी करने लगी। उनके इतने सारे लोगो से संपर्क थे , जिसकी वजह उनका इंफ्रोमेशन  हुआ होगा।  लेकिन वो वाकई जासूस थी , इसका ठीक प्रमाण नहीं था , जर्मनी  ने तो बाद में यह भी  माना की उसने कोइ महत्वपूर्ण डाटा नहीं दिया  था।  सिर्फ इधर - उधर की गॉसिप और कुछ नहीं।  फिर भी ,  फ्रांस ने उसको डबल एजेंट मान कर उनको शूट करने की सजा दी थी। 

सच में , माता - हारी हालत की शिकार हुई थी , ऐसा मानते है , शायद किसी ने उसके खिलाफ पैसे देकर उनको मौत की सजा सुनाई थी।  पता नहीं सबूत तो उतने नहीं थे , ऐसा हो सकता है और एक थ्योरी है की माता हारी सबसे बड़ी जासूस थी और उनके द्वारा प्रथम विश्वयुद्ध में बहुत सारी बाते इधर - उधर लीक हुई थी,  इसलिए भले ही सबूत कम हो लेकिन इस बात के पक्के प्रमाण होने के कारण उनको सजा मिली।  खैर जो भी हो , सच आज तक किसी को नहीं पता की वो एक जासूस थी या फिर एक डांसर। 



प्रह्लाद जानी 


प्रह्लाद  जानी जो एक माता जी  अन्यन्य भक्त है , वो आंबे माँ के बहुत बड़े भक्त है।  आपको यह जान कर आश्चर्य होगा की  उन्होंने पिछले सत्तर सालो से एक भी बूँद पानी या भोजन नहीं ग्रहण किया है। 

इसका  बात का पता लगाने के लिए  उन्हें एक कमरे में पंद्रह दिन तक चौबीस घंटे निगरानी में रखा गया और जहा रखा गया वंहा आक्सीजन के   अलावा और कुछ  भी नहीं था। इसके बाद भी उनको न तो कोई हाइड्रोजन हुआ और न ही कोई भूख भी नहीं लगा।  उनके सारे हेल्थ पैरामीटर एक नौजवान के जैसे थे , वैसे ही निकले और कोई दिक्कत या कम्प्लीकेशन नहीं।  

आश्चर्य है , बिना किसी भोजन के और पानी के हम छह घंटे नहीं रह सकते और कोई सत्तर साल तक कुछ भी ग्रहण नहीं किया।  अब यह एक अनसुलझा रहस्य है और बहुत शक्ति है देवी अम्बा की भक्ति में। 

प्रह्लाद जी  अगर हम सबको भी तरकीब बता दें तो हमारे देश की भुखमरी ख़त्म हो सकती थी और गरीबी भी गायब हो जाती।  तब राजनीती करने के लिए नेताओ को कोई नई विषय ढूढ़ना पड़ता। 

वाकई अपने देश की गरीबी तो आज कल मजाक बन कर रह गयी।  हर कोइ आकर  मजाक उडाता है।  और अमीरी के आलीशान कालीन पर रखा एक एंटीक पीस बन गया होगा।  कुपोषण और भुखमरी के शिकार बच्चो के तस्वीरो को देखकर इनका दिल क्यों नहीं पिघलता।  अपने बैंक के अकाउंट से अगर ये प्रतिशत भी दे ये तो  कितने लाखो बच्चो को भोजन मिल जाता।  लेकिन इनको राजनीती करने के अलावा ख्याल ही कहा है।  



रूपकुंड झील के कंकाल 




1942 में , रूपकुंड झील के फारेस्ट रेंजर ने  झील के किनारे कुछ मानव कंकाल देखा।  सालो से  यूरोपियन और भारतीय शोधकर्ताओं ने  बहुत सरे शोध किये लेकिन इनका कोई सही कारण नहीं जान सके है , इन हड्डियों का कार्बन - डेटिंग पता करने पर पता चलता है की ये 12 वीं  और 14 वीं शताब्दी के है।  कुछ सिद्धन्तो के मुताबिक यह हड्डिया संग्रहित कर के रखी गयी है। एक बात और है की , द्वतीय विश्व युद्ध में भारी मात्रा में मारे गए जापानी सैनिक को यहाँ दफनाया गया था। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है की मुहम्मद तुगलग का कोई असफल अभियान इन कंकालों के पीछे था।  या है। एक अटकल और भी है की हो सकता की इस इलाके में कोई भारी तूफान आया हो जिससे बहुत सारे लोग मारे गए हो।  

जो भी है , इतने बड़े मात्रा में कंकाल का पाना यह बताता है की बहुत भारी मात्रा में नरसंहार हुआ है।  परन्तु क्या है इस पहेली को कोई शोधकर्ता सुलझा नहीं पाया।  जिसका जवाब इतिहास के किसी ऐसे पन्ने में है जिसको आजतक पता नहीं। 



बरमुंडा ट्रायंगल 


बरमुंडा ट्रायंगल के नाम से जाना जाने  वाला यह इलाका।  मियामी , बरमुंडा और पोर्टो रीको के बीच  पड़ता है।  इस इलाके से गुजरने वाले पायलट बताते है की यहाँ कई हवाई जहाज गायब हो चुके है , साथ ही कई पानी के जहाज भी समंदर में गायब हो चुके है। , अलग - अलग लोगे इसको एलियंस और गैसीय प्रेशर को जिम्मेदार ठहराते है ,मगर अब तक इसके पीछे का आजतक  कोइ न जान सका है।  



आइलैंड ऑफ़ डेड 


इटली में एक ऐसा आइलैंड है , जिसे आइलैंड ऑफ़ डेड , के नाम से जाना जाता है।  ऐसा कहा जाता है की यहाँ जाने वाले लोगों का जिन्दा बचकर लौट पाना मुश्किल है।  दरअसल इस आइलैंड से जुडी हुई खौफनाक कहानी है , जिसकी वजह से लोग यहाँ जाने से डरते है  और लोग वंहा जाना भी नहीं चाहते।  आइये बताता हूँ क्या है वो कहानी है। 

बताया जाता है। की सैकड़ो साल पहले इस आइलैंड पर प्लेग के मरीजों को मरने के लिए यहाँ लेकर छोड़  दिया गया था। बाद में ब्लैक डेथ ( काला बुखार ) के समय भी आइलैंड का ऐसा इस्तमाल जारी रहा। 

ऐसे  में जो लोग मर जाते थे , उन्हें यही पर दफना दिया जाता था। बाद में मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए लगभग 1  लाख 60 हजार बीमार लोगो को जिन्दा जला दिया गया था। इसके बाद से लोगे इसे भुतहा मानने लगे और ये  आइलैंड पूरी तरह से वीरान हो गया। 

हालाकिं , 1922 में इस आइलैंड पर हॉस्पिलट बनाया गया , लेकिन कुछ सालो बाद ही इसे बंद कर दिया। बताया जाता है की यहाँ पर डॉक्टर नर्सो को कई चीजे आसामन्य नजर आने लगी थी।  वही पागल खाने में भर्ती मरीजों को भी प्लेग के मरीजों के भूत दिखाई देते थे।  

मेन्टल हॉस्पिटल के बंद होने के कई साल बाद तक यह आइलैंड दुबारा वीरान पड़ा रहा।  इसके बाद इटली की सरकार ने  1960 में इसे प्राइवेट मालिक को बेच दिया। वह शख्स अपनी फैमली के साथ कुछ ही दिन रहा।  फिर इस  जगह को छोड़ कर चल गया। इसके बाद एक दूसरे मालिक ने इसे हॉलिडे होम बनाने के लिए खरीदा , लेकिन वह भी यहाँ एक ही दिन टिक सका।  कहा जाता है , की आइलैंड के मालिक की बेटी के मुँह में किसी ने काट लिया था।  जिसे जोड़ने के लिए चौदह टांके लगाने पड़े। 

इन तमाम घटना के बाद भी कई लोगो ने इसकी जांच पड़ताल करने की कोशिश की।  लेकिन सच की तलाश में गए ज्यादातर लोग जिन्दा वापस लौट कर नहीं आ सके और यह आइलैंड हमेशा के लिए वीरान हो गया।  हालाँकि जो लोग बचकर वापस लौट आये उनका कहना था की यहाँ पर बीमारी से मरे हुए लोगो की आत्माएं भटकती है। 

 हालाँकि , इस भूतिया आइलैंड की सच्चाई क्या है , अभी भी एक रहस्य है। 



नागमणि का रहस्य 


मानव सभ्यता के विकास के साथ हमने आस पास के जीवों को पूजना और उनको महत्त्व देना आरम्भ किया है।  ऐसा करने का फायदा यह हुआ  की हमने जीवों के मारने के बजाये सुरक्षित किया है।  शिवजी नागों को धारण करते थे तो  हम इन साप की प्रजातियों को मारने की बजाय इनको सपेरे मनोरंजन का साधन भी बना दिया। इन सापों  के बारे में वृहत्सहिंता में एक विशेष वर्णन मिलता है , इनकी मणि को लेकर , इनकी बहुत सारी कहानिया भी है  जो सच है या नहीं किसी को नहीं पता।  लेकिन मणि की तलाश में न जाने कितने लोग सर्पदंश का शिकार हो चुके है।  


लोच झील का रहस्य 

माना जाता है की स्कॉटलैंड की लोच झील में  , एक  दैत्य का रहस्य छिपा हुआ है।  यह रहस्य 1933 में पहली बार तन सामने आया था , जब लोगों ने झील में एक दैत्याकार जीव को देखा था।  हालाँकि , कुछ रिपोर्ट में डायनासोर प्रजाति का विलुप्त जीव , प्लेसेसौर ,माना जाता रहा है , जो गहरे पानी में रहता है और कम ही सतह पर आता है। 




कसारा घाट ; मुम्बई  - नासिक हाईवे 




मुम्बई - नासिक हाईवे का कसारा घाट , डरावना है क्योकिं यहाँ भूत दिखने और अहसास होने के कई किस्से सामने आ चुके है।  कभी किसी को बिना सर की बुजुर्ग महिला दिखती है , तो किसी को पेड़ पर लटका हुआ बुजुर्ग नजर आता है।  सड़क के किनारे दोनों घने पेड़ होने से रात के वक्त यह रास्ता बेहद डरावना हो जाता है। 




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