तीन मजेदार कहानियाँ - हिंदी में -three funny stories in hindi
( पहली कहानी )
कवि और डाकू
एक कवि गरीबी से तंग आकर डाकू बन गया। डकैती करने वह बैंक में गया जाकर सबके ऊपर पिस्तौल टांग दिया और बोला।
अर्ज किया है -
तकदीर में जो है , वही मिलेगा
तकदीर में जो है. वही मिलेगा
हैंड्स उप ,अपनी जगह से कोई नहीं हिलेगा।
कैसियर के पास जाकर कहता है -
अपने कुछ ख्वाब मेरी आँखों से निकाल लो
अपने कुछ ख्वाब मेरे आँखों से निकल लो
और जो भी हो तुम्हारे पास है। वह जल्दी से मेरे बैग में डाल दो।
जब वह बैंक लूट चूका था तो जाते - जाते बोल के जाता है की -
भुला दे मुझे , क्या जाता है तेरा
भुला दे मुझे , क्या जाता है तेरा
मैं गोली मार दूंगा जो किसी ने पीछा किया मेरा।
( दूसरी कहानी )
विष्णु जी को खत
एक बच्चे को साईकिल चाहिए थी। माँ - बाप ने मना कर दिया तो वह उदास हो गया। फिर उसके दिमाग में एक ;ख्याल आया की क्यों नहीं वो भगवान से साइकिल के पैसे मांग ले। उसने एक लेटर लिखा और डाक खाने के डिब्बे में डाल आया।
लेटर में लिखा था -
क्षीर सागर
वैकुण्ठ धाम
विष्णु जी को मेरा सादर प्रणाम। यूँ तो आपका दिया हुआ सब कुछ है। बस एक साईकिल की कमी है। अगर आप 5000 रूपए भिजवा दें तो भक्त पर बड़ी कृपा होगी।
आपका -प्यारा बंटी
जब डाक विभाग वालों को पत्र मिला तो उनको बड़ा दुख हुआ। सबने चंदा इक्कठा किया और पांच हजार रूपए जमा कर के उस लड़के को मणि आर्डर करके भिजवा दिया।
मनी आर्डर पाकर लड़का बड़ा खुश हुआ। एक हप्ते बाद उसने फिर से एक पत्र लिखा - विष्णु जी के नाम
क्षीर सागर
वैकुण्ठ धाम
विष्णु जी को सादर प्रणाम। भगवन आपके भेजे हुए पैसे मिल गए हैं। बहुत धन्यवाद - वैसे तो आपने पूरे छह हजार भेजे होंगे। पर बेडा गर्क हो इन डाक वालो का - सालों ने हजार रूपए डकार लिए।
आपका प्यारा - बंटी
( तीसरी कहानी )
मरवा दिया पठान ने
पठान अपनी बैलगाड़ी में अनाज के बोरे लादकर शहर लेकर जा रहा था। अभी गांव से निकला ही था की एक खड्ढे में उसकी गाडी पलट गयी। पठान गाड़ी को सीधी करने की कोशिश करने लगा। थोड़ी ही दूर पर एक पेड़ के नीचे बैठ कर एक राहगीर ने यह देख कर आवाज दी की - अरे भाई - परेशांन मत हो आ जाओ मेरे साथ खाना खा लो मैं तुम्हारी गाडी सीधी करवा दूंगा।
पठान बोला धन्यवाद पर मैं अभी नहीं आ सकता। मेरा दोस्त बशीर नाराज हो जायगा।
राहगीर बोला अरे तुझसे अकेले नहीं उठेगी गाड़ी। तू आजा खाना खा ले फिर हम दोनों उठायेंगे।
पठान नहीं बशीर गुस्सा हो जायगा। राहगीर बोला अरे मान भी जा। आ जाओ तुम मेरे पास।
पठान बोला ठीक है आप कहते है तो है। तो आ जाता हूँ।
पठान ने जमकर खाना खाया फिर बोला। अब मैं चलता हूँ गाड़ी के पास और आप भी चलिए। बशीर गुस्सा हो रहा होगा।
राहगीर ने मुस्कराते हुए कहा चलो पर तुम इतना क्यों डर रहे हो ? वैसे अभी बशीर कहाँ होगा।
पठान बोला - गाड़ी के नीचे दबा हुआ है
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