एक बहादुर राजकुमार की कहानी | a story of a brave prince in hindi .
एक छोटा सा राज्य था जिसका नाम विक्रमपुर था | वहा का राजा विक्रमसिंह था | उसका राज्य हर चीज से संपन्न था | राजा आपने राज्य की देख - भाल बहुत अच्छी तरह से करता था | उसके राज्य में चारो तरफ खुशिया ही खुशिया थी | उसके राज में हिरन और शेर एक ही घाट से पानी पीते थे | बहुत शांति थी | वहां पर चारो तरफ हरियाली थी | विक्रमसिंह की तीन रानीयाँ थी | पर उनके किसि कारणवस किसी की कोई संताने थी | राजा और रानिया उसी चीज से चिंतित रहा करती थी | राजा की भी उम्र काफी हो चुकी थी आस -पड़ोस के राजा भी उसे राज्य की खुशियों से जलते थे | वो भी घात लगाए बैठे हुए थे | राजा एक दिन इसी बात से काफी चिंतित हो गया | वह बहलाने के लिए शिकार के लिए गया | शिकार करते हुए राजा को काफी रात हो चुकी थी उसके साथी भी उससे बिछड़ कर काफी पीछे हो गए थे | राजा को ज्यादा रात के अँधेरे में ज्यादा दिखाई नहीं देने लगा | और वह विश्राम लिए कोई जगह तलाश करने लगा | जगह तलाश करते हुए उसे रात में जंगल के बीच में दीपक का उजाला दिखाई दिया | जो एक कुटी के अंदर जल रहा था | राजा वहां पंहुचा और अपने घोड़े को उसी कुटी के सामने एक वृक्ष से बांध दिया | राजा दिनभर शिकार करने की वजह से भूखा और प्यासा भी था | और उसके अंदर इतनी भी क्षमता नहीं थी की वह खाने पीने की व्यवस्ता कर सके उसने धीरे से उसे कुटी बाहर से आवाज लगाई | तभी उसी कुटी से एक साधु महात्मा बाहर आये | उन्होंने राजा से उसका परिचय राजा ने अपने बारे में बताया और सारी घटना भी बताया की वह कैसे अपने साथियो से बिछड़ गया |
साधु ने उसे रात को रुकने के लिए स्थान दिया और खाने के लिए भोजन दिया | राजा ने रात वही पर बिताया जब सुबह हुई | तो राजा को फिर वही चिंता खटकने लगी और राजा को वापस अपने अपने राज्य वापस जाने का मन नहीं किया | राजा वही पर रुक कर उसी साधु की सेवा करने लगा | साधु की सेवा करते हुए राजा को काफी समय चूका था | साधु भी उसकी सेवा से काफी खुश था | एक दिन साधु ने राजा से उसके राज्य के बारे में पूछा और राजा को वापस अपने राज्य जाने की सलाह दी लेकिन राजा ने वापस जाने से मना कर दिया तो साधु ने उसका कारण पूछा तो राजा ने अपनी कोई संतान न होने की सारी बात साधु को बताई | साधु भी उसकी सेवा से बहुत खुश था तो उसने राजा को संतान होने का जरिया बताया | की जंगल के बीच में एक आम का पेड़ है | अगर तुम एक तीर से जितने आम तोदोगो तो उतनी ही संताने प्राप्त होगी | पर राजन मेरी एक सर्त है राजा ने पूछा क्या है महाराज जी तो साधु ने कहा जो आपका बड़ा और वीर संतान होगी | वो संतान मुझे चाहिए | राजा ने उस साधु की बात मान ली | और राजा उस पेड़ के पास पंहुचा राजा ने वैसा ही किया जैसा साधु राजा ने ठीक वैसे ही किया | उसने एक तीर निकला और उसे एक तीर से एक आम के गुच्छे पर निशाना लगा कर उसे तोड़ लिया उसे गुच्छे में पांच आम थे | राजा उन आम को लेकर साधु के पास पंहुचा और साधु से विदा मांगी जाने के लिए | साधु ने जाने को उसे आज्ञा दे दी | और कहा की राजा जब तुम्हारी संताने बड़ी और योग्य हो जायँगी तब मैं तुम्हारी एक संतान लेने आउगा | राजा ने आश्वासन दिया | और वहा से प्रस्थान किया | राजा जब आपने राज्य पहुंचा तो सभी रानियों से मिला और रानियाँ भी राजा को बहुत समय के पश्चात् देख कर बहुत खुश हुई | राजा ने अपनी सभी रानियों में से सबसे बड़ी रानी को आम दिया और सभी को आम देने को कहा बड़ी रानी सबसे छोटी रानी को पसंद नहीं करती थी | तो उसने एक आम खुद खा लिया और एक आम मंझली रानी को दिया | बाकी बचे 3 आम को फैक दिया | छोटी रानी एक बिल्ली और कुत्तिया पाले हुए थी छोटी रानी ने उन आमो को लाने के लिए बिल्ली को आदेश दिया वह बिल्ली उन तीनो आमो को उठा लाई | उनमे से एक आम छोटी रानी ने खाया एक बिल्ली ने और एक कुत्तिया ने खाया | जो उसके छिलके थे तो वही पर बंधी एक घोड़ी को डाल दिया | कुछ समय के पश्चात् उन दो बड़ी रानी से राजा को माँ बनने की खबर मिली और छोटी रानी ने माँ बनने की खबर गुप्त रखी | कुछ दिन के बाद दोनों रानी से एक _ एक पुत्र की उत्पन्न हुए | और वही छोटी रानी के 2 पुत्र हुये | राजा को पुत्र प्राप्ति की ख़ुशी मिली तो वह बहुत खुश हुआ | सारे राज्य में खुशिया आ राज्य को फूलो से सजाया गया | मंगल गीत गाये गए सारे राज्य को इंद्रपुरी की तरह सजावट की गई | छोटी रानी ने आपने दोनों पुत्रो को छिपा कर रखा | कुछ समय बीत जाने के बाद बड़े राजकुमारों को शिक्षा के लिए एक अच्छे गुरु कुल भेजा जहा उनको अच्छी शिक्षा मिल सके | और वहीं छोटी रानी ने आपने दोनों पुत्रो का लालन पालन घर पर ही किया | छोटी रानी ने आपने पुत्रो को शिक्षा के साथ -साथ उनको राजनीती का भी अच्छा ज्ञान दिया | समय के साथ - साथ राजा की भी उम्र कम होती जा रही थी | और राजकुमारों की शिक्षा भी समाप्त हो गई | और राजा ने राजकुमारों को वापस अपने राज्य में बुलवा लिया | और कुछ समय के बाद राजा ने अपने सबसे बड़े राजकुमार को राजगद्दी सौपने का निर्णय लिया |
तभी उसी वक्त उस साधु का आगमन हुआ | और उस साधु ने राजा को नया राजा बनाने से रोका और राजा को कहा की राजन आप तब तक अपने राज्य का नया राजा नहीं चुन सकते जब तक आपका दिया हुआ वचन पूरा न हो जाये | राजा को अपना वचन स्मरण हो आया और राजा ने -अपने बड़े राजकुमार को साधु के साथ जाने की आज्ञा दी साधु ने अपने साथ बड़े राजकुमार को साथ लिया और राजा आज्ञा मांग कर वहां से प्रस्थान किया | साधु राजकुमार लिवा कर एक तिराहे में जाकर रुक गया और राजकुमार से पूछा तुम कौन से रास्ते से चलना चाहोगे क्योकि इनमे से सारे रस्ते मेरी कुटिया तक जाते है | इनमे से एक रास्ता एक साल का है जिसमे कोई खतरा नहीं है | और दूसरा रास्ता छह महीने का है : जिसमे दो नदिया है जो मगरमच्छ जैसे खतरनाक जीवो से भरी हुई है | और तीसरा रास्ता तीन महीने का है जो जंगलो और पहाड़ो से होकर गुजरता है | और बहुत ही मायावी जंगल है वहां पर तुम्हारी जान जाने जाने का खतरा है | तो तुम कौन से रास्ते से जाना चाहोगे। राजकुमार ने तुरंत एक साल वाला रास्ता चुना इससे बात को सुन कर साधु ने कमर में छिपी कटार को निकल कर राजकुमार के नाक और कान काट दिए और राजमहल की तरफ भेज दिया। राजा ने जब उसका कारन पूछा राजकुमार ने साड़ी बात बताई और कहा की पता नहीं किस बात पर महात्मा जी को गुस्सा आ गया जो मेरे साथ ऐसा किया।उसी वक्त वह साधु भी आ पंहुचा और कहा राजा तुम्हारा पुत्र कायर और डरपोक है, जिसकी वजह से यह मेरे किसी काम का नहीं है इसको तुम आपने पास रखो मुझे तुम्हारा दूसरा पुत्र चाहिए जो मंझली का है। राजा ने अपने दूसरे राजकुमार को साथ जाने का आदेश दिया
साधु उसे दूसरे राजकुमार को साथ लिवा कर वह से चल दिया और उसी तिराहे में जाकर खड़ा हो गया और फिर से उसने एक रास्ता एक साल वाला और दूसरा रास्ता छह महीने और तीसरा रास्ता तीन महीने वाला बताया और उन रास्तो में आने वाली संकट से अवगत कराया। इतना सुन कर राजकुमार ने फिर से कुछ देर सोचा और उसी एक साल वाले रास्ते से जाने के लिए कहा, इसी बात से साधु को फिर से क्रोध आ गया और खंजर निकाल कर दूसरे राजकुमार के नाक और कान काट लिए. और वापस राजमहल भेज दिया | राजकुमार जब महल वापस आया तो राजा को काफी चिंता होने लगी की | यह राजकुमार भी बड़े राजकुमार की तरह ही है और उस साधु का वचन भी पूरा नहीं हुआ | उसी वक्त साधु भी गुस्से में आ पंहुचा और राजा से कहा कैसे कायर पुत्र है तुम्हारे जिनमे वीरता का एक अंस भी नहीं | हमें आपका तीसरा बड़ा पुत्र चाहिए | राजा ने कहा महात्मन हमारा और कोई तीसरा पुत्र नहीं है | साधु ने जब यह बात सुनी तो हसने लगा और कहा राजन आपके महल में क्या होता है ये आपको नहीं पता क्या जो ऐसी बात कर आपकी छोटी रानी के तीन के दो पुत्र है हमें उनका एक पुत्र चाहिए। राजा ने तुरंत छोटी रानी को राजदरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया। राजा की आज्ञा सुन कर छोटी रानी तुरंत राजदरबार में पहुंची राजा ने साडी सच्चाई रानी से पूछी। रानी ने सारी बात राजा को वृतांत से बताया राजा ने जब सारी बात सुनी तो उसे दुःख हुआ और अपनी गलती का अहसास भी। राजा ने दोनों राजकुमारों को सभा में बुलवाया। और खुस होकर उन दोनों से मिले। साधु ने कहा हमें राजन आप पुत्र मोह में अपना दिया हुआ वचन भूल रहे है। राजा ने आपने तीसरे बड़े राजकुमार को साधु के साथ जाने का आदेश दिया। आपने पिता की आज्ञा सुन कर तीसरा राजकुमार जाने के लिए तत्पर हुआ। और अपनी माता से आज्ञा ली। राजकुमार जाने के लिए जैसेही तैयार हो रहा था तभी उस बिल्ली का का बच्चा भी राजकुमार के साथ जाने के लिए तैयार हो गया। राजकुमार ने अपनी सवारी के लिए उसी घोड़ी के एक पुत्र को जो की सवारी के लिए तैयार किया। वह घोडा राजकुमार के बचपन से ही सवारी थी वह दोनों एक दूसरे को अपना मित्र मानते थे। राजकुमार बिल्ली का बच्चा और घोडा तीनो साधु के साथ चले गए। साधु फिर उन्हों तिराहे में जाकर खड़ा हो गया। और राजकुमार से कहा इनमे से एक रास्ता एक साल का है जो बहुत लम्बा है और एक रास्ता छह महीने का है पर उसमे दो नदिया है। जो खतरनाक जीवो से भरी हुए है। और एक रास्ता तीन महीने का है जिसमे खतरनाक और मायावी जंगल है और भाती -भाँती के जीव जंतु है जिनमे तुम्हारी जान जाने का खतरा है। राजकुमार ने कुछ देर तक सोचा और फिर उस तीन महीने वाले रस्ते को चुना जिसको सुनकर साधु खुश हो गया और राजकुमार को जाने की आज्ञा दे दी। राजकुमार ने अपने घोड़े पर सवार हुआ और निकल पड़ा साधु भी आपने उड़ने वाली खड़ाऊ को पहन कर उसे छह महीने वाले रस्ते से निकल पड़ा। राजकुमार ने घोड़े के हाथ फेरा और उसकी लगाम को टाइट कर जैसे ही लगाम को ढीली की घोडा हवाओं से भी तेज भागने लगा राजकुमार ने उसे मायावी जंगल को पार करने के बाद एक नदी के पास आराम किया। और घोड़े को छुट्टा कर दिया ताकि वह भी विश्राम और भोजन कर सके रात तीनो ने उसी नदी के किनारे गुजारी। सुबह होते ही तीन ने नित्य क्रिया की और फिर वह से प्रस्थान किया। तीनो ने एक बार फिर से अपनी ताकत का जोड़े लगाया और तीन महीने के रस्ते को पच्चीस दिन में समाप्त कर लिया। राजकुमार जब साधु की बताए हुए जगह पर पंहुचा तो उसे कोई भी कुटिया नहीं मिली वह पर कुछ गुफाये थी और चारो तरफ पहाड़ ही पहाड़ थे । राजकुमार सोच में पद गया साधु ने जैसा बताया था......... वंहा वैसा कुछ भी नहीं था। राजकुमार ने सोचा की यहाँ हम वक्त से पहले पहुंच गए है। और साधु भी यहाँ उपस्थित नहीं है। क्यों न इन पहाड़ो और गुफाओ की सैर कर ली जाये। तीनो वह से चल दिए घूमते -घूमते तीनो एक गुफा में पहुंच गए। वंहा देखा तो राजकुमारों के सिरों के ढेड़ पड़े हुए है। जब राजकुमार ने उनको सिरों को देखा तो हल्का भय उत्पन्न हुआ। और देखते ही देखते वंहा सारे पड़े सर हसने लगे। राजकुमार ने निकाली और पूछा तुम सभी क्यों हस रहे हो इतना सुन कर सभी सर रोने लगे और बोले की कुछ दिनों बाद जब साधु यहाँ आ जायगा ,तो तुम्हारा भी सर हमारी तरह यही पर रखा होगा। राजकुमार ने कहा क्यों - तभी सभी सरो ने जवाब दिया की राजकुमार हम भी कभी तुम्हारे तुम्हारे जैसे - राजकुमार ही थे। इस साधु ने छल से हमारे माता -पिता को लालच दिला कर हम सभी को यंहा लिवा लाया। और एक पूजा के बहाने हम सभी का सर काट कर यहाँ रख दिया। राजकुमार ने जब यह सुना तो असमंजस में फस गया। और पूछा कैसी पूजा - तब वहां रखे सरो ने जवाब दिया। की साधु तुमसे एक शैतान की पूजा करवाएगा। और उसी शैतान के सामने एक कड़ाई रखी हुई है। उस कड़ाई के तुमसे सात चक्कर लगवाएगा ताकि शैतान तुम्हारी बलि को स्वीकार कर सके। और उस कड़ाई को झुक कर आशीर्वाद लेने को कहेगा जैसे ही तुम उस कड़ाई के सामने झुकोगे वही पास में रखी तलवार से तुम्हारा सर काट देगा - इतना कह कर सभी सर चुप हो गए। और कुछ देर बाद फिर से सारे सर जोर - जोर से रोने लगे तब राजकुमार ने पूछा अब क्या हुआ अब क्यों रोने लगे तब सभी सरो ने फिर से जवाब दिया की राजकुमार आज उसकी आखिरी बलि है आज वह तुमको मार कर अमर हो जायगा और हम सब भी पूरी तरीके से मर जायँगे- राजकुमार तुम यहाँ से भाग जाओ कही दूर ताकि तुम बच सको इस साधु के रूप में शैतान से - राजकुमार ने हिम्मत और साहस से जवाब दिया की नहीं राजकुमारों ,मै तुम जैसे बहादुर मित्रो को छोड़ कर कही नहीं जाउगा जिन्होंने मेरी इतनी फिक्र की ,मैं इस डोंगी साधु का सर धड़ से अलग कर के तुम सभी को दुबारा जिन्दा कर दूंगा तब सरो ने जवाब दिया की यह इतना आसान नहीं है राजकुमार अगर ऐसे इसको मारा जा सकता तो हम कब का इसको मार देते। इस साधु को अपनी जान इतनी प्यारी है की इस साधु ने अपनी जान को शरीर से निकाल कर एक तोते में कैद कर रखा है वह तोता खुले आसमान में उड़ता रहता है। वह सिर्फ तभी आता जब उसको शैतान साधु को अपने शरीर में जान की जरूरत होती। और साधु को जान की जरूरत सिर्फ उसको बलि के समय पर होती। परन्तु अगर साधु के शरीर में जान भी हो तब भी हम उसे नहीं मार सकते - उसको सिर्फ तभी मार सकते जब उसका सर एक ही वार में उसी कड़ाई में गिरे जिसमे हम सभी सरो की बलि चढ़ाता है। राजकुमार ने सभी का साहस बढ़ाया। और धन्यवाद कर के वंहा से निकल गया। फिर एक बड़े से वृक्ष की छाँव में रुक कर तीनो उपाय मिल कर उपाय निकालने लगे। की कैसे साधु को मारा जाये। तभी राजकुमार के दिमाक में उपाय आया उसने सारी बात अपनी बिल्ली को बताया और सारी तरकीब बिल्ली को समझाया तीनो ने तीनो के अनुसार काम अपने हिस्से का ले लिया। साधु के आने में समय था काफी तो तीनो गुफाओ की सैर किया। पर साधु भी अपने उड़ने वाली खड़ाऊ के जरिये तीन महीने का सफर चालीस दिन में खत्म कर के वंहा पर पहुँच गया. साधु जब पंहुचा तो तीनो भी वह उपस्थित थे। यह देख कर साधु और भी खुश हो गया की वह अब और ही जल्दी अमर हो जायगा। उसने राजकुमार को बड़ी चतुराई के साथ कहा की राजकुमार हमें एक पूजा करनी है तुम्हारे लिए ताकि जब तुम यंहा से जाओ तो एक शक्ति शाली राजा बन सको। राजकुमार उसकी बातो को समझ गया। और पूजा के लिए हामी भर दी। यह पूजा अमावस्या के दिन होनी थी जो की अमावस्या आने में दो दिन का समय था। राजकुमार को अमावस पूजा के एक -दो दिन पहले भाँती-भाँती के फल खिलाये। और कथाएँ सुनाई ताकि राजकुमार का विश्वास और अच्छे से जीत सके। राजकुमार उसकी सच्चाई पहले से ही जानता जिसकी वजह से वह उसकी बातो में नहीं आया। जब दो दिनों के बाद अमावस्या की रात आई तो राजकुमार को पूजा के लिए चलने को कहा, राजकुमार ने बिल्ली को इसारा दिया तो बिल्ली भी राजकुमार और साधु के पीछे - पीछे चुपके से चल दिया। साधु ने पूजा की सामग्री पहले से ही सब कुछ तैयार कर रखा था। राजकुमार और साधु गुफा के अंदर पहुंचे। और राजकुमार को एक आसन में बैठाया और पूजा चालू कर दी। उसी वक्त वह तोता भी आकर उसी शैतान के कंधे में जाकर बैठ गया। राजकुमार ने बिल्ली को इसारा किया की वह हमले के लिए तैयार हो जाये। साधु ने उस शैतान की -पूजा ख़त्म किया और बलि देने का वक्त भी आ गया। साधु ने राजकुमार को शैतान के सामने रखी कड़ाई के चक्कर लगा कर। आशीर्वाद लेने के लिए कहा राजकुमार वंहा से चक्कर लगाने के लिए खड़ा हुआ और कड़ाई के पास पहुंच कर खड़ा हो गया। यंहा - वंहा घूमने लगा साधु ने देखा तो थोड़ा असमंजस में पड़ गया.की राजकुमार कड़ाई के चक्कर क्यों नहीं लगा रहा ,साधु ने फिर से राजकुमार से कहा राजकुमार तुम कड़ाई के चक्कर क्यों नहीं लगा रहे. चक्कर लगा कर जल्दी से आशीर्वाद प्राप्त करो- राजकुमार ने मुस्कराते हुए जवाब दिया की उसे चक्कर काटना नहीं आता। साधु ने कहा रुको। मैं बताता हु कैसे करना है। साधु ने उस कड़ाई के चक्कर काटना शुरू कर दिया। .जैसे ही आखिरी चक्कर ख़त्म होने वाला था तो राजकुमार ने बिल्ली को इसारा दिया तो बिल्ली ने झट से उसे तोते पर हमला कर दिया और एक ही प्रहार में उसकी जान ले ली। उधर साधु ने जैसे ही सर झुकाया कड़ाई के सामने राजकुमार ने कमर में बंधी तलवार से तुरंत साधु का सर काट दिया। तोता के मर जाने से उस समय साधु की जान भी उसके शरीर में थी , इसी प्रकार साधु का अंत हुआ। साधु के मर जाने के बाद वंहा भर जितने भी राजकुमार थे सरे जीवित हो गए। और राजकुमार के पास पहुँच कर जय -जय करने लगे और डेढ़ सारी खुशिया मनाई। सभी राजकुमारों ने कुछ दिन उन्ही गुफाओ में बिताया और खूब सारी मजे किये वंहा पर। कुछ दिनों के बाद राजकुमार ने सभी को अपने -अपने राज्य वापस जाने को कहा। तो कोई भी वंहा से जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। तभी राजकुमार ने समझाया सभी को की अपने घर जाओ आपके माता पिता आप लोंगो का इंतजार कर रहे होंगे। राज्कुअमार के बहुत प्रयास करने के बाद सभी वंहा से जाने के लिए तैयार हो गए. और जाते -जाते सभी राजकुमारों ने कहा की हम सभी के राज्य आज से आपके अधीन है - आप जब चाहे तब हम सभी और हमारी सेना का उपयोग कर सकते है। इतना कह कर सभी वंहा से चले गए। राजकुमार भी वंहा से जाने के लिए तैयार होकर पड़ा। राजकुमार को वापसी में उस मायावी जंगल से होकर जाना था।
यह कहानी बहुत बड़ी है। इसीलिए इसके आगे की कहानी हम दूसरे अध्याय में लिखेंगे। अगर आप लोंगो को यह कहानी अच्छी तो जरूर इसके कमेंट सेक्शन में जवाब दे। ....... यहाँ तक आने और वेबसाइट में क्लिक लिए धन्यवाद। ☺


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